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खाद, कीटनाशक और बीज दुकानें बंद, दुकानदार हड़ताल पर

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छिंदवाड़ा। देश के खाद,बीज और कीटनाशक विक्रेताओं की समस्याओं को लेकर सोमवार को दुकानें बंद रही। दुकानदारों ने लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्ट्रेट में सौंपते हुए समस्याओं के निराकरण की मांग की।
खाद बीज विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष शिव कुमार शर्मा और सचिव श्याम राव कपाले ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के सम्बंधित अधिकारियों तक बार-बार निवेदन किए जाने के बाद भी समस्याओं का निराकरण नहीं होने के कारण 27 अप्रैल को पूरे देश के कृषि आदान व्यापारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर हैं। प्रमुख मांगो में यह है कि निर्माता कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों की ‘जबरन लिंकिंग’ को अपराध घोषित किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय की तर्ज पर पूरे देश में अनुदानित उर्वरक के साथ गैर-अनुदानित उत्पाद बेचने की बाध्यता पर रोक लगे। डिलीवरी डीलर के बिक्री केंद्र (Point of Sale) तक कंपनियों द्वारा सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में खाद की डिलीवरी रेल-हेड पर दी जा रही है, जिससे डीलरों को प्रति 40 से 50 रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है।

इसी तरह लागत और महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8% किया जाए। साथी’ (SATHI) पोर्टल में राहतः ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए इस पोर्टल को वैकल्पिक बनाया जाए और इसकी अनिवार्यता केवल निर्माताओं एवं थोक विक्रेताओं तक सीमित रखी जाए। HTBT बीज नीतिः अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगे या अधिकृत डीलरों को विनियमित (Regulated) बिक्री की अनुमति दी जाए। विक्रेता को ‘साक्षी’ का दर्जा: खाद, बीज एवं कीटनाशक के सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को अपराधी नहीं, बल्कि केवल गवाह माना जाए। चूंकि विक्रेता जिला कृषि अधिकारी से प्राप्त लाइसेंस के आधार पर केवल सीलबंद माल बेचता है, अतः गुणवत्ता की पूर्ण जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए। एक्सपायर्ड कीटनाशक नीतिः कंपनियों के लिए पुराने या एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए। कानूनी संशोधनः- नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को ‘प्रथम पक्ष’ (First Party) बनाने के कठोर प्रावधान को शिथिल किया जाए। जांच कमेटी बनाई जावे किसानों द्वारा झूठी शिकायतें करते हुए व्यापारियों को ब्लैकमेल किया जाता है। ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करने के पहले जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई जावे उसके अनुशंसा के बाद ही कार्रवाई की जावे। 21 दिन में बहाली छोटी-मोटी बातों पर उप संचालक कृषि द्वारा लाइसेंस निलंबित किए जाने पर 21 दिन में स्वतः बहाली का प्रावधान किया जावे । हर साल PC जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त हो खाद एवं बीज के लाइसेंस की अवधि 5 वर्ष एवं कीटनाशक के लाइसेंस आजीवन है ऐसी स्थिति में हर साल कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता को समाप्त किया जावे।

दोहरी लायसेंस प्रथा बन्द हो कई राज्यों में अनाज और उद्यानिकी के बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की प्रक्रिया है जबकि बीज अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है इस प्रथा को समाप्त किया जावे । देश भर के कृषि आदान विक्रेताओं की विभिन्न समस्याओं (कठिनाईयों) के उचित समाधान हेतु संबंधित मंत्रालयों को न्यायोचित कार्यवाही हेतु निर्देशित करेंगे तथा लाखों व्यापारियों को व्यापर में आने वाली समस्याओं को दूर कर राहत प्रदान कराए। न्याय न मिलने पर मज़बूरी में आगामी खरीफ सीजन के पूर्व मजबूरी में अनिश्चितकालीन बंद करना होगा जिससे देश के कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव होने के साथ-साथ किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जवाबदारी राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों की होगी।